माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप माँ चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है, जिनकी पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष रूप से की जाती है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ माँ चंद्रघंटा की आराधना करते हैं, जिससे जीवन में शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नवरात्रि के तीसरे दिन साधक का मन मणिपूर चक्र में स्थित होता है, जो शक्ति, आत्मविश्वास और ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक अनुभव होने लगते हैं, जैसे दिव्य सुगंध का अहसास, अनसुनी ध्वनियों का श्रवण और अद्भुत दृश्य दिखाई देना।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय साधक के लिए बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील होता है। इसलिए इस अवस्था में मन को स्थिर और सजग रखना आवश्यक होता है, ताकि साधना का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सके।
माँ चंद्रघंटा – नवरात्रि के तीसरे दिन की देवी (Day 3 Significance)
नवरात्रि के पावन पर्व के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य, शांत और कल्याणकारी है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर वे शत्रुओं का संहार करने के लिए सदैव तैयार रहती हैं।
🌼 माँ चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप
माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है, जो घंटे के आकार जैसा दिखाई देता है। इसी कारण उन्हें “चंद्रघंटा” नाम प्राप्त हुआ है। उनका शरीर स्वर्ण के समान चमकदार और तेजस्वी होता है, जो दिव्यता और शक्ति का प्रतीक है।
🔱 दशभुजाधारी स्वरूप
माँ चंद्रघंटा की दस भुजाएँ हैं, जिनमें वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और दिव्य वस्तुएँ धारण करती हैं:
- खड्ग (तलवार)
- त्रिशूल
- गदा
- धनुष-बाण
- कमल का फूल
- खप्पर
- घंटा
- अभय मुद्रा (भय को दूर करने का आशीर्वाद)
यह स्वरूप दर्शाता है कि माँ अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर प्रकार से सक्षम हैं।
🦁 वाहन – सिंह
माँ चंद्रघंटा सिंह (शेर) पर सवार रहती हैं, जो साहस, वीरता और निर्भयता का प्रतीक है। उनका यह रूप बताता है कि वे हर प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं।
✨ स्वरूप और विशेषता
माँ का रूप बाहर से अत्यंत सौम्य और शांत है, लेकिन अधर्म और अन्याय के खिलाफ उनका रौद्र रूप भी उतना ही प्रबल है। वे सदैव धर्म की रक्षा और बुराई के विनाश के लिए तत्पर रहती हैं।
🙏 महत्व और लाभ
माँ चंद्रघंटा की पूजा से:
- जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है
- भय और नकारात्मकता का नाश होता है
- मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है
- सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है
उनकी कृपा से भक्तों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है।
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श्लोक
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता | प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता ||
स्वरूप
माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।
प्रिय भोग
माता का प्रिय भोग है दूध या दूध से बनी मिठाई जिसका फल है– मानसिक शांति और भय से मुक्ति।
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